हीरों में हीरा हैं डॉ. ओमप्रकाश प्रजापति : राही राज

हीरों में हीरा हैं डॉ. ओमप्रकाश प्रजापति : राही राज

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बेंगलुरु l दुनियाँ में अनेक तरह के इंसानों को ईश्वर नें बनाया मगर एक इंसान जो उन्होंने बनाया है वो मैं सौ फीसदी नाम के अनुसार खरा उतरा है और वह नाम है डॉ. ओमप्रकाश प्रजापति l इस नाम में तीन शब्द है और तीनों शब्द इन पर सटीक बैठते है ओम का रूप है प्रकाश देते है और प्रजापति क़ी तरह रहना इनका गुण है l बहुत कम ही लोग होते है जो नाम के अनुरूप चलते है और कार्य शैली को अंजाम तक ले जाते हैं l डॉ. ओमप्रकाश प्रजापति क़ी कार्य शैली क़ी जितनी भी तारीफ करूँ कम ही है l कल मैं सोशल एंड मोटिवेशनल ट्रस्ट में एक साक्षत्कार देख रहा था, जिसमे अरुणा जी साक्षत्कार क़र रहीं थी और ट्रू मीडिया के संपादक डॉ. ओमप्रकाश प्रजापति जी साक्षात्कार दे रहे थे, और उन्होंने जो बातें बताई वह अनुकरणीय है l मान- सम्मान का ताँता लगा हुआ है इनके जीवन में l क्या नहीं है इनके जीवन में, जमीं से जुड़ा हुआ आदमी और इस बुलंदियों तक पहुंचे तों हम जैसे लोगों को वाकई गर्व होता है l इसलिए क़ी ये हमारे दोस्त है l बहुत नाम सुन रखा था प्रजापति जी, ये है प्रजापति वो है पर नजदीक से मिलने का जब सौभाग्य हुआ तब पता चला वाकई में ये आदमी हीरों में हीरा है तब ही तों इन्हें हीरों में हीरा सम्मान से विभूषित किया गया है l मेरी पहली मुलाक़ात इनसे मगसम के पटल पर हुई पहले तों हमें लगा क़ी ये आदमी घमंडी है लेकिन जैसे ही हाथ मिलाया हमे पता नहीं क्या चमत्कार हुआ, मैं समझ नहीं पाया और मेरी धारणा गलत साबित हुई, इतने अच्छे विचारवान व्यक्ति कहाँ मिलते है, उनका शब्दों का चयन, उनके बात करने का तरीका हमें आकर्षित करती ही चली गईं, एक बात बताना तों मैं भूल ही गया, इनका मुस्कुराने तरीका गजब है, हू बहु मेरे पिताजी से मिलती है l हमें लगता है ये मोहिनी मंत्र जानते है, भला कैसे मैं आकर्षित होते चला गया l इस बार मैं मिलूंगा तों पूछुंगा, हालाँकि मैं भी वशीकरण जानता हूँ ऐसा मैं नहीं कहता मेरे बारे में लोग कहते है l

एक चीज और हमने गौर किया क़ी ये काम को तवज्जो देते हैं, एक दिन तीन- तीन प्रोग्राम करते है, अटेंड करते है और बखूबी निभाते है यह इनकी विशेषता है, हमने उस दिन भी देखा एक प्रोग्राम करके आए, दूसरा क़र रहे थे और तीसरे के लिए रवानगी थी l दूसरे दिन हम फिर मिले, फिर वही गर्म जोशी से स्वागत, वही तेवर, वही मुस्कान और वही बात करने का तरीका l वाकई में इनका मैं भी कायल हो गया हूँ अबकी बार मिलूंगा तों पुछुगा कहाँ से आती है इतनी इनर्जी, क्या खाते है जो तरो- तज़ा और आनंदित रहते हैं, इनके नाम अनेको सम्मान है जो क़ी मैं वर्णन करूँ तों सारा दिन निकल जाएगा, प्रतिदिन इन्हें सम्मान मिल रहा है स्वभाविक है जो कर्म करेगा वही अधिकारी भी है l सम्मान तों चलता रहेगा महत्वपूर्ण है कर्म और कर्म से बढ़कर कुछ नहीं होता है l क्योंकि मेरी ही पंक्तियां है

राहे कठिन है फिर भी चलना है,

जिंदगी के दौर में गिर क़र सम्हलना है l

आज इतना ही, मौका मिलेगा और हम मिलेंगे डॉ. ओमप्रकाश प्रजापति से तों फिर लिखेंगे l तब तक के लिए इजाजत दीजिए राही को l शब्बा खैर l

रिपोर्ट-राही राज, बैंगलुरु

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