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आम बजट में अर्थ व्यवस्था को और मजबूत करने की जरुरत।

सिने आजकल नयी दिल्ली 24 जनवरी 2023 (एजेंसी)।देश के सुप्रसिद्ध अर्थ शास्त्रियों शिक्षाविदों एवं कानून के जानकारों ने आगामी बजट में अर्थ व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए कई रियायतें देने की आवश्यकता जतायी है।

संसद का बजट सत्र 31 जनवरी को शुरू होने बाला है।इसी सत्र में आम बजट पेश किया जायेगा,जिसपर देशभर की नजर लगी हुई है।

प्रसिद्ध अर्थ शास्त्री एवं पेशे से सीए गोपाल कुमार केडिया (जीके केडिया)ने कहा है,कि नोटबंदी एवं कोरोना संकट के बाद से देश की अर्थ व्यवस्था में काफी सुधार हुआ है,लेकिन इसमें और मजबूती लाने के लिए आगामी आम बजट को बेहतर एवं जन उपयोगी बनाने की आवश्यकता है।

श्री केडिया ने कहा है कि मौजूदा जीडीपी 7 प्रतिशत है।पिछले 9 माह में प्रत्यक्ष कर से 12 लाख करोड़ एवं जीएसटी से भी करोडों रुपये इकठ्ठे हुए।इसका मतलब है, कि अर्थ व्यवस्था संतोषजनक है।बाजार में उछाल है।इसे और मजबूत करने के लिये उद्योग जगत को करों में रियायत देने की जरुरत है।

दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर योगेश कुमार ने कहा है,कि कोरोना संकट के बाद से बाजार में उछाल जरूर आया है,लेकिन उद्योग जगत को करो में रियायत देने से न सिर्फ अर्थ व्यवस्था मजबूत होगी,बल्कि रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।उन्होंने कहा है, कि खासकर ऐसे उद्योग को करो में रियायत मिलनी चाहिए जो हजारों की संख्या में रोजगार मुहैया करा रही है।

प्रो.कुमार ने कहा है कि कोरोना संकट से प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी योजना स्किल डिवेलपमेंट काफी प्रभावित हुआ।इस पर काफी ध्यान देने की जरुरत है।वर्तमान में देश में कुशल कामगारों की संख्या काफी कम है।जब यह संख्या कम से कम 70 प्रतिशत को पार नहीं करेगा तब हम आर्थिक दृष्ट से विकसित देशों की श्रेणी में नहीं होंगे।

वरिष्ठ अधिवक्ता रंजन कुमार ने कहा है कि नोटबंदी एवं कोरोना संकट के बाद से देश की अर्थ व्यवस्था पर काफी असर पड़ा।इससे पटरी पर लाने की कोशिशें लगातार जारी है,किन्तु सबसे बड़ा सवाल बेरोजगारी है।

श्री कुमार ने कहा है कि सरकारी आंकड़े कुछ भी हो लेकिन हालात संतोषजनक नहीं है।बड़े पैमाने पर लोग बेरोजगार हैं।उद्योगजगत की हालत अभी भी ख़राब है

।उन्हें आयकर एवं जीएसटी ने और कमर तोड़ रखा है।बजट में उन्हें रियायत मिलना चाहिए।एल.एस।

सिहेक्ट मीडिया नई दिल्ली से उषा पाठक वरिष्ठ पत्रकार की खास खबर

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